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हाइकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग की आवासीय कालोनी में अतिक्रमण पर स्टे हटाने से किया इनकार,प्राधिकरण से मांगा जवाब

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर लोक निर्माण विभाग की आवासीय कॉलोनी में किए गए अतिक्रमण पर विक्रम सिंह दानू की तरफ़ से स्टे हटाये जाने की प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया है. इसके साथ ही जिला विकास प्राधिकरण से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.

उच्च न्यायालय ने निर्माण कार्य पर रोक को भी जारी रखा है. हाईकोर्ट ने एसडीएम बागेश्वर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं. मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 21 सितंबर की तिथि नियत की है. आज मंगलवार को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ में हुई.

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24 अगस्त को उच्च न्यायालय ने उक्त मामले में सुनवाई के बाद निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश दिए थे. इसके साथ ही उस दिन की सुनवाई में सभी पक्षकारों नोटिस जारी करने के साथ ही निर्माणाधीन भवन को सील करने के आदेश भी जारी किए थे.

मामले के अनुसार व्यापार संघ बागेश्वर के अध्यक्ष कवि जोशी ने जनहित याचिका याचिका दायर कर कहा है कि बागेश्वर तहसील रोड पर स्थिति लोक निर्माण विभाग की आवासीय कॉलोनी के अंदर निजी व्यक्ति द्वारा पीडब्ल्यूडी की भूमि पर अतिक्रमण कर बृहद व्यावसायिक निर्माण किया जा रहा है. याचिका में पीडब्ल्यूडी के अधिशाशी अभियंता द्वारा ज़िला प्रशासन को उक्त निर्माण कार्य पर रोक लगाये जाने संबंधी पत्राचार किया गया है, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

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याचिका में यह भी कहा गया है कि सिंचाई विभाग बागेश्वर के नहर के ऊपर भी निजी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है. इस पर भी रोक लगाई जाये. जनहित याचिका में ज़िलाधिकारी उपज़िलाधिकारी, तहसीलदार, बागेश्वर अधिशाशी अभियंता लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग बागेश्वर सहित विक्रम सिंह दानू (विवेक होटल) बागेश्वर को पक्षकार बनाया गया है.

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