बागेश्वर। खदानों का संचालन बंद किए जाने की कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने शनिवार, 17 अक्टूबर को जिला कार्यालय में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। नवीन कुमार के समर्थन में धरने पर बैठे ग्रामीणों ने खदानों का संचालन प्रतिबंधित करने की कार्रवाई का वैधानिक आधार स्पष्ट करने और पूर्व में जारी न्यायालय एवं शासन के आदेशों के अनुपालन की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खनन कार्य प्रभावित होने से ग्रामीणों और मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नवीन कुमार की दोनों खदानें उन 29 खदानों में शामिल हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत संचालन की अनुमति दी गई थी। उन्होंने शासन की ओर से 18 नवंबर 2025 को जारी अनुपालन आदेश का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि खदानों का संचालन बंद करने की कार्रवाई किस वैधानिक आधार पर की गई है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने खनन अधिकारी की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी संचालन प्रतिबंधित करने के आदेश पर आपत्ति जताते हुए उसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से संबंधित निरीक्षण रिपोर्ट, नोटिस, सुनवाई की प्रक्रिया और अन्य जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रदर्शनकारियों ने अपने ज्ञापन में खान अधिनियम, 1952, खनन एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मामले में स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने राज्य सरकार और नवीन कुमार के बीच हुए पट्टा विलेख की शर्तों के अनुरूप कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि खदानों का संचालन बंद होने से खनन कार्य से जुड़े मजदूरों, वाहन चालकों और अन्य लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। खनिज परिवहन से जुड़े कामकाज पर भी इसका असर पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों की आजीविका पर संकट मंडराने लगा है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से खदानों का संचालन प्रतिबंधित करने के आदेश का वैधानिक आधार सार्वजनिक करने, पूर्व के न्यायालय एवं शासन के आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने और प्रभावित लोगों को हुए आर्थिक नुकसान का आकलन कर उचित प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे मामले में पारदर्शिता और नियमानुसार कार्रवाई चाहते हैं। अब उनकी नजर संबंधित अधिकारियों के रुख और प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर टिकी है।







