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उत्तराखंड सूचना आयोग ने एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद संबंधी सूचनाएं उपलब्ध नही कराने पर नगरपालिका पर लगाया 25 हजार का जुर्माना

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उत्तराखंड सूचना आयोग ने लोकसूचना अधिकारी पर लगाया जुर्माना

हरिद्वार। एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद संबंधी समयबद्ध सूचनाएं उपलब्ध न कराने पर उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने नगरपालिका शिवालिकनगर के अधिशासी अधिकारी/लोकसूचना अधिकारी अंकित राणा पर पच्चीस हजार का जुर्माना लगाया है।


शिवालिकनगर नगर पालिका के विरूद्ध स्ट्रीट लाइट खरीद में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर सुभाषनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोक चन्द्र भट्ट द्वारा सूचना के अधिकार के तहत लोकहित में 27 नवंबर, 2020 को नगरपालिका के लोक सूचना अधिकारी/अधिशासी अधिकारी से एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद संबंधी दस बिन्दुओं पर समयबद्ध सूचना मांगी गई थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। विभागीय अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर करने के बाद भी उनकी अपील नहीं सुनी गई। जिसके बाद 20 फरवरी, 2021 को त्रिलोक चन्द्र भट्ट द्वारा शिवालिकनगर नगर पालिका के लोकसूचना अधिकारी और प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी के विरूद्ध उत्तराखण्ड सूचना आयोग देहरादून में द्वितीय अपील प्रेषित की गई।


उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने अपीलार्थी को डेढ़ साल तक सूचना न दिये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक सूचना अधिकारी और विभागीय अपीलीय अधिकारी को 30 मई, 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। आयोग का नोटिस मिलते ही लोक सूचना अधिकारी ने आनन फानन में अपीलार्थी को आधी अधूरी और अस्पष्ट सूचनाएं भेज दी। लेकिन दोनों अधिकारियों द्वारा अपीलार्थी को अब तक सूचनाएं उपलब्ध न कराये जाने और प्रथम अपील न सुने जाने पर कोई स्पष्टीकरण नही दिया।


उत्तराखण्ड सूचना आयोग, देहरादून में हुई सुनवाई में लोक सूचना अधिकारी/अधिशाषी अधिकारी अंकित राणा मामले की सुनवाई कर रहे राज्य सूचना आयुक्त अर्जुन सिंह के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुये और न ही उन्होंने अपने समकक्ष अथवा एक पद नीचे के अधिकारी को प्रतिनिधि नामित करते हुए भेजा। इसके विपरीत उन्होंने एक आउट सोर्स कर्मी प्रथम कुमार को आयोग में होने वाली सुनाई में भेज दिया। सूचना आयोग ने समयबद्ध सूचनाएं न देने और सूचना आयुक्तों के आदेशों संबंध में सजगता और जागरूकता की कमी के साथ इसे घोर लापरवाही मानते हुए उन पर 25000 रूपया जुर्माना लगा दिया है। राज्य सूचना आयुक्त ने आदेश दिया है कि यह राशि तीन में माह के भीतर राजकोष में जमा की जाय। उनके द्वारा यह राशि जमा न कराये जाने पर लोक प्राधिकारी/नगर पालिका परिषद को उनके वेतन से जुर्माने की राशि की कटौती के आदेश दिये गये हैं।


आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को गभीरता ने न लेने और भट्ट की प्रथम अपील का निस्तारण न करने पर प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी के विरूद्ध भी अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु लोक प्राधिकारी को संस्तुति भेजी है।

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