इस्तांबुल में खेली जा रही महिला विश्व मुक्केबाजी चेम्पियनशिप में भारतीय महिला मुक्केबाज निकहत जरीन ने भारत का सिर गर्व से उंचा कर दिया है। शानदार खेल के दम पर फाइनल में जगह बनाने वाले इस मुक्केबाज ने देश को गोल्ड मेडल दिला दिया है। फाइनल मुकाबले में थाइलैंड की जुतामास जितपोंग से निखत का सामना हुआ। जहां उन्होंने 5-0 से एकतरफा जीत हासिल की।
तेलंगाना की मुक्केबाज जरीन ने थाईलैंड की प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराया। इस जीत के साथ जरीन विश्व चैंपियन बनने वाली सिर्फ पांचवीं भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। छह बार की चैंपियन एमसी मैरीकोम (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018), सरिता देवी (2006), जेनी आरएल (2006) और लेखा केसी इससे पहले विश्व खिताब जीत चुकी हैं। जरीन के स्वर्ण पदक के अलावा मनीषा मोन (57 किग्रा) और पदार्पण कर रही परवीन हुड्डा (63 किग्रा) ने कांस्य पदक जीते। पहले राउंड में भारतीय स्टार ने शानदार खेल दिखाते हुए थाईलैंड की मुक्केबाज पर करारे प्रहार करते पंच लगाए और सभी जजों को उन्होंने प्रभावित किया। पहले राउंड के बाद जहां निकहत तो सभी जज की तरफ से 10 अंक मिले। वहीं जुतामास को नौ अंक हासिल हुआ। दूसरे राउंडर में निकहत जरीन पर थाईलैंड की मुक्केबाज थोड़ी हावी नजर आईं। तीसरे राउंड में थाईलैंड की मुक्केबाज ने कुछ आक्रामक पंच लगाए और राउंड खत्म होने के बाद वह जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही थीं। निकहत को भी अपने पंचों पर पूरा भरोसा था और जजों की राय भारत के हक में गई।











