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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाल दिवस धूमधाम से मनाया

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय बागेश्वर में भगवत सिंह डसीला अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी बागेश्वर के नेतृत्व में स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का जन्म दिवस बाल दिवस के रूप में बड़ी ही धूमधाम व मिष्ठान वितरण कर पंडित जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर मनाया गया।

इस मौके पर एक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। जिसमे सभी ने अपने अपने उद्बोधन भी दिए। 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। जो की स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर मनाया जाता हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू जी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और भारतवर्ष के प्रथम प्रधानमंत्री थे, आजादी से पहले और आजादी के बाद भी उन्हें भारतीय राजनीति में एक केंद्रीय योद्धा माना जाता था, नेहरू जी का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था, और नेहरू जी 1947 से 1964 में अपनी मृत्यु तक देश की सेवा की। कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़ाव के कारण उन्हें पंडित नेहरू के नाम से जाना जाता था। और बच्चों के दुलारे होने और उनके बच्चों के साथ अथाह लगाव होने के कारण बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कह के बुलाते थे। जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को व्यापक रूप से बाल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। जवाहरलाल नेहरू जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे, वह एक अद्भुत राजनेता, प्रखर वक्ता और राष्ट्रवादी थे। वह एक दृढ़ इच्छा शक्ति वाले व्यक्तित्व के नेता थे। जो कि गांधीवादी समाजवादी विचारधारा पर अडिग रहते थे। जवाहरलाल नेहरू जी की शिक्षा कैंब्रिज के हैरो और ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने इनर टेम्पल से कानून में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पंडित नेहरू जी ने भारतवर्ष और विश्व पर दो पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया और ग्लिम्पसेस ऑफ द वर्ल्ड पुस्तक लिखी। दोनों पुस्तकों से भारतवर्ष ही नहीं बल्कि विश्व के बारे में उनकी विशाल ज्ञान को उजागर करती हैं। जवाहरलाल नेहरू की स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान वर्ष 1934-35 एवं वर्ष 1945 में दो बार अल्मोड़ा जिला कारागार में बंद रहे। आजादी की लड़ाई में अल्मोड़ा जेल में बंद रहने के दौरान उन्होंने अपनी किताब मेरी आत्मकथा के कुछ अंश लिखे थे। जवाहरलाल नेहरू जी ने अल्मोड़ा जेल में विताये गए दिनों में जेल से ही ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने की रणनीति भी बनाई थी। नेहरू जी को दो बार अल्मोड़ा जेल में रखा गया था। अल्मोड़ा जेल में पंडित नेहरू जी अपने साथियों को आंदोलन को सफल बनाने की रणनीतियों पर चर्चा करते और नए क्रांतिकारी बंद होते थे तो उनसे बाहर की हालातो का जायजा लेते थे। और जो छूटने वाले क्रांतिकारी होते थे, उन्हें आजादी के आंदोलन को धार कैसे देनी हैं, उसके बारे में बताते। नेहरू जी को दो बार अल्मोड़ा जेल में बतौर कैदी रखा गया था। वह यहां कुल 317 दिन तक रखे गए। पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ अल्मोड़ा जेल में पंडित गोविंद बल्लभ पंत, खान अब्दुल गफ्फार खां, देवी दत्त पंत, आचार्य नरेंद्र देव, बद्री दत्त पांडे, हरगोविंद पंत, विक्टर मोहन जोशी, सैय्यद अली जहीर और दुर्गा सिंह रावत आदि क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बतौर कैदी बंद रहे।

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