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ब्रिटिश कालीन पैदल झूला पुल आवागमन के लिए आगे भी रहेगा बंद: अनुराधा पाल

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बागेश्वर शहर में सरयू नदी पर ब्रिटिश कालीन निर्मित 41.30 मीटर स्पान का झूला पैदल पुल जो बहुत पुराना हो चुका है, का जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने अधिशासी अभियंता लोनिवि, सिंचाई, राष्ट्रीय राजमार्ग व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका की संयुक्त टीम द्वारा तकनीकी संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण कराया गया। संयुक्त टीम द्वारा अपनी जांच आख्या में बताया गया कि सेतु 1913 में निर्मित किया गया है। इसलिए सेतु 110 वर्ष पूर्ण कर चुका है, सेतु के दोनों ओर एंकर ब्लॉक पर प्रवेश किया जाना संभव नहीं है।

साथ ही कहा कि झूला पुल में मुख्य लंबा गार्डर, क्रॉस गार्डर सहित अन्य गार्डर का लम्बे समय से उचित रख-रखाव नहीं होने तथा सेतु अत्यधिक पुराना होने के कारण इनके ऊपर जंग पड़ गया है। जिसके कारण इनकी भार वहन क्षमता कम हो गयी है।तथा झूला पुल के दोनों साईडों की रैलिंग वर्तमान में ठीक अवस्था में है, साथ ही मेन वायर रोप की स्थिति भी ठीक प्रतीत हो रही है।
वायर रोप से जो सस्पेंडेर सेतु में क्रास गर्डर पर टाई हो रखा है। उन पर भी अधिकांश रेवेट्स में जंग लगने के कारण रेवेट्स सड़ गल गयी है। सेतु के दाये एवटमेन्ट में नीचे जो दीवार निर्मित है, उस पर दरारे दृष्टिगोचर हो रही है। वर्तमान में सरयू नदी में जल स्तर काफी ऊचांई में बहने के कारण एवटमेन्ट के ठीक नीचे की क्या स्थिति है, उसका भी आकलन किया जाना सम्भव नहीं है। साथ ही बताया कि सेतु के बाये एवटमेन्ट के नीचे सरयू नदी का जल स्तर अधिक होने के कारण एवटमेन्ट में नीचे की स्थिति का अन्वेषण किया जाना सम्भव नहीं है। साथ ही संयुक्त टीम द्वारा सेतु सेफ्टी ऑर्डर की कार्यवाही किसी मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान से किए जाने का उल्लेख करते हुए वर्तमान में समस्त परिस्थितियों के मध्य नजर रखते हुए सेतु का उपयोग आवागमन हेतु बंद रखा जाना उचित होगा से अवगत कराया गया है। जिस पर जिलाधिकारी ने मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान से सेतु सेफ्टी ऑडिट कराने हेतु पत्र शासन को भेजा गया है। इसलिए अग्रिम आदेशों तक पैदल झूला पुल को आवागमन हेतु पूर्णतः बंद किया जाता है।

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