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शुद्धता के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण का दे रहे है संदेश, गाय के गोबर और मिट्टी के मिश्रण से बने दिए

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रिपोर्ट – लता

दीपावली के त्योहार में इस बार गाय के गोबर और मिट्टी के मिश्रण से बने दीए इस बार सभी के लिए आकर्षक का केन्द्र बने हुवे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वय सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए दियों को हर कोई हाथो—हाथ ले रहे हैं। इन दीपकों की रोशनी से दीपावली का त्यौहार तो जगमग होगा ही साथ ही महिलाओ के लिए यह रोजगार का साधन भी बन रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बागेश्वर जिले में स्वय सहायता समूह की महिलाओं ने इस बार के दीपावली त्योहार में गाय के गोबर तथा मिट्टी के मिश्रण से बने दिए बाजार में उतारे हैं। इसके साथ ही गाय के गोबर से मोमबत्ती को भी बाहर से लेप कर आकर्षक सजावट में बनाया गया है। इन दीपकों को जलाने से जहां घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है वहीं इससे पर्यावरण संरक्षण का मकसद भी पूरा होगा। बागेश्वर की जय गंगा नाथ स्वय सहायता समूह की 20 महिलाए इस काम को बखूबी कर रही हैं। अभी तक महिलाओ ने गोबर से बने दिए और मोमबत्ती बेचकर अस्सी हजार तक का मुनाफा कमा लिया है। महिला समूह से जुड़ी अनिता टम्टा ने बताया कि गाय को हमारे धार्मिक रूप में मां का दर्जा है और गाय का गोबर शुद्व माना जाता है। इसी इसके महत्व को देखते हुए इसके दिए बनाए गए है जिसको लोग काफी ज्यादा मात्रा में खरीद भी रहे है।
वही महिला समूह से जुड़ी रेखा देवी ने बताया की गोबर के दिए काफी ज्यादा मात्रा में लोगो द्वारा खरीदे जा रहे हैं और उन्हें लाभ भी काफी हो रहा है। उन्हे गोबर के दियों की लागत ज्यादा नही बैठती और इन दियों से शुद्धता के साथ-साथ पर्यावरण को भी लाभ होता है

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